Tuesday, August 9, 2011

कौन हूं मैं.


आपका अवनीश
एक आम इंसान  की कहानी उसी की जुबानी हां तो दोस्तों मौसम तो सुहाना है पर ये तो एक बहाना है दरअसल हम तो आज मौजूद है कुछ बताने के लिए कुछ समझाने के लिए मतलब मेरे दोस्त कुछ दिखाने के लिए तो अपनी बंद आंखों को खोलिए और ध्यान दीजिए बाबमैंगोपीपल के प्रवचन पर

भगवान इंसान को धरती पर क्यों भेजता है अपने पास क्यों नहीं रखता..

इंसान का ये मानव देह बहुत ज्यादा अच्छे कर्मों के बाद ही मिलता है ऐसा मैं नहीं कहता बहुत से आप ही की तरह मैंगों पीपल से सुना.
भगवान जब इंसानों को इस धरती पर भेजता है तो एक मेहरबानी जरुर कर दे उन्हें ये बता कर भी भेजे की उनका क्या काम है वो इस धरती पर क्यूं आए है..क्योंकि आज भटकते हुए लोगों को देखकर उनके अंदर भी मैने झांक कर देखा है कि तु भटकता है किस दिशा में तुझे जाना किस दिशा में... दिशा तो चार होती है... मौसम भी चार होते है...पता नहीं कौन सी दिशा किस मौसम की ओर हमें ले जाएगी..
इसी असमंजस में मैं फंसा हूं, मै कौन हूं ये न मै जान सका हूं.. क्योंकि मैं तो हर किसी के अंदर बसा हूं.. मैं अगर मैं न होता तो ... तो असमंजस में फंसा हुआ मैं नहीं होता.. मुझे जाना है कही  पर मेरे बस में नही क्योंकि मैं जा तो सकता हूं . पर जाने की हिम्मत जुटा नहीं पाता .. मैं भी इस सांसारिक मोह माया में फंसा हूं , क्योंकि मुझे भी इस संसार के दुश्मनों ने बांध कर रखा हुआ है.. जानते हो मेरे और आपके ये दुश्मन कौन है.. ईष्या, काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहम् और माया इन सात . ये सात दुश्मन हैं, जो दोस्तों से भी प्यारे है... जो अलग-अलग रुप रखकर अपना रुप दिखलाते है.. मैं कैसे कहूं .. मैं खुद इस मोहजाल में जकड़ा हुआ हूं. क्योंकि मैं हर किसी में बसा हुआ हूं.. मैं कौन हूं.. अपने अंदर झांक कर देखों ,,







1 comment:

  1. क्या खूब लिखते हो बड़ा सुंदर लिखते हो फिर से लिखों लिखते रहो बड़ा अच्छा लगता है जीवन की ये सच्चाई बड़ा सजीव लगती है.. वाह वाह वाह 1008 बार वाह बधाई हो अवनीश बाबू आगरा वाले

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